दिल्ली Hc में मेटा ने कहा: फ्री स्पीच के लिए हमें बाध्य नहीं किया जा सकता, हम निजी संस्था हैं

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रदीप पाण्डेय
Updated Fri, 06 May 2022 10:21 AM IST

सार

याचिका के जवाब में मेटा ने कहा कि उसका इंस्टाग्राम एक स्वतंत्र और स्वैच्छिक प्लेटफॉर्म है जो एक निजी अनुबंध द्वारा चलाया जा रहा है और याचिकाकर्ता के पास इसका उपयोग करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

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फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (फ्री स्पीच) के कानून को लागू करने के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। मेटा का कहना है कि वह एक निजी संस्था है, ऐसे में वह किसी सार्वजनिक दायित्व का निर्वहन नहीं करती है। बता दें कि एक इंस्टाग्राम अकाउंट को डिसेबल करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मेटा के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। 

याचिका के जवाब में मेटा ने कहा कि उसका इंस्टाग्राम एक स्वतंत्र और स्वैच्छिक प्लेटफॉर्म है जो एक निजी अनुबंध द्वारा चलाया जा रहा है और याचिकाकर्ता के पास इसका उपयोग करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा कई उपयोगकर्ता खातों को निलंबित करने और हटाने को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को सीज कर लिया है।

इसी साल मार्च में एक ट्विटर अकाउंट के निलंबन के खिलाफ एक अन्य याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्रता को सामाजिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं छोड़ा जा सकता है। नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और यह भारत के संविधान के अनुरूप होना चाहिए।

मेटा ने अपने एफिडेविट में कहा है कि एक निजी संस्था होने के नाते उसके खिलाफ अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले अधिकारों का दावा करने का प्रयास अनुचित है और यह कानून के विपरीत है। इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए। मेटा का कहना है कि याचिकाकर्ता ने एक भी ऐसे सबूत प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे साबित हो सके कि इंस्टाग्राम सर्विस या स्वयं मेटा पब्लिक ड्यूटी का निर्वहन करता है।

विस्तार

फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (फ्री स्पीच) के कानून को लागू करने के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। मेटा का कहना है कि वह एक निजी संस्था है, ऐसे में वह किसी सार्वजनिक दायित्व का निर्वहन नहीं करती है। बता दें कि एक इंस्टाग्राम अकाउंट को डिसेबल करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मेटा के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। 

याचिका के जवाब में मेटा ने कहा कि उसका इंस्टाग्राम एक स्वतंत्र और स्वैच्छिक प्लेटफॉर्म है जो एक निजी अनुबंध द्वारा चलाया जा रहा है और याचिकाकर्ता के पास इसका उपयोग करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा कई उपयोगकर्ता खातों को निलंबित करने और हटाने को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को सीज कर लिया है।

इसी साल मार्च में एक ट्विटर अकाउंट के निलंबन के खिलाफ एक अन्य याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्रता को सामाजिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं छोड़ा जा सकता है। नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और यह भारत के संविधान के अनुरूप होना चाहिए।

मेटा ने अपने एफिडेविट में कहा है कि एक निजी संस्था होने के नाते उसके खिलाफ अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले अधिकारों का दावा करने का प्रयास अनुचित है और यह कानून के विपरीत है। इसे अस्वीकार किया जाना चाहिए। मेटा का कहना है कि याचिकाकर्ता ने एक भी ऐसे सबूत प्रस्तुत नहीं किया है, जिससे साबित हो सके कि इंस्टाग्राम सर्विस या स्वयं मेटा पब्लिक ड्यूटी का निर्वहन करता है।

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